IMPORTANCE OF REGIONAL LANGUAGES IN ARCHITECTURE

Ashok Goel

Ashok Goel

Author

Architect (40 yrs exp) / RTI Activist B.arch, P.G. Diploma in Journalism Author of various books

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“Time has come to decide whether we want architects or those ‘professionals’ who can speak good English”

 

Why deprive those who are not so fluent in the Firangi language. If we can print newspaper and magazines in regional languages why not books?

If we can have TV channels in regional languages why can’t we teach them Architecture or engineering in regional languages? Are we short of resources? No. Certainly not. 

 

We have movies in regional languages. We have stars in regional languages…

Can you ignore Rajnikanth, Kamal Haasan, Ram Teja, Mahesh Babu, Jayalalitha, NT Ramarao?

 

Resources will come from the particular region only. The regulatory bodies only have to give permission. Why deprive non English students of moving forward in life? We have representatives of every state in our Council of Architecture. We may start regional chapters of CoA to monitor regional issues.

The new team of CoA should consider the request. Don’t follow what our ‘Purvaj’ did in previous years. Leaders always lead. They don’t follow what others do.

 

We request our honourable MHRD minister to kindly give instructions to architecture and engineering colleges to start one batch in each architecture college in Hindi medium or in the local language of that particular state. 

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अब समय है की तय किया जाये की हम आर्किटेक्ट चाहते हैं या वे ‘पेशेवर’ जो सिर्फ अच्छी अंग्रेजी बोल सकते हैं।

जो लोग फिरंगी भाषा  बोलने में इतने अच्छे नहीं हैं, उन्हें आर्किटेक्चर से वंचित क्यों किया जाये। अगर हम क्षेत्रीय भाषाओं में अखबार और पत्रिकाएं छाप सकते हैं तो किताबें क्यों नहीं?

अगर हमारे पास क्षेत्रीय भाषाओं में टीवी चैनल हो सकते हैं तो हम क्षेत्रीय भाषाओं में आर्किटेक्चर या इंजीनियरिंग क्यों नहीं सिखा सकते? क्या हमारे पास  संसाधनों की कमी है? नहीं, बिल्कुल भी नहीं।

हमारे पास क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्में हैं, हमारे पास क्षेत्रीय भाषाओं के सितारे हैं … क्या आप रजनीकांत, कमल हासन, राम तेजा, महेश बाबू, जयललिता, एनटी रामाराव को नजरअंदाज कर सकते हैं?

संसाधन केवल एक विशेष क्षेत्र से आएंगे। संबंधित संस्थाओं को केवल अनुमति देनी होगी। गैर-अंग्रेजी छात्रों को हम जीवन में आगे बढ़ने से वंचित क्यों कर रहे हैं? हमारे काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर में हर राज्य के प्रतिनिधि हैं। क्षेत्रीय मुद्दों की निगरानी के लिए हम COA  की क्षेत्रीय शाखाएँ शुरू कर सकते हैं।

COA  की नई टीम के इस अनुरोध पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पिछले वर्षों में हमारे ‘पुरवाज’ ने जो किया, सिर्फ उसका फॉलो करना उचित नहीं।

हम अपने माननीय MHRD मंत्री से अनुरोध करते हैं कि कृपया आर्किटेक्चर और इंजीनियरिंग कॉलेजों को निर्देश दें कि वे प्रत्येक आर्किटेक्चर कॉलेज में हिंदी माध्यम में या उस विशेष राज्य की स्थानीय भाषा में एक बैच शुरू करें।

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